Rishton ki Dor : कहानी रिश्तों की डोर एक सामाजिक ताने बाने में बुनी हुई कहानी है। इस कहानी का पात्र सागर एक बहुत ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है, वह अपने माता पिता का बहुत ख्याल रखता था, साथ ही साथ उसे शालिनी से बहुत प्यार था।
शालिनी एक ऐसी लड़की थी, जो जीवन में बहुत कुछ हांसिल करना चाहती है, और सागर एक तरफ उसके पिता की जानलेवा बीमारी, दूसरी और शालिनी का प्यार।
पिता की बीमारी ने उसे तोड़ कर रख दिया। इधर शालिनी भी इसी कश्माकश में थी, उसे लगने लगा था, कि सागर एक हारा हुआ इंसान है, जो शायद उसे कभी भी खुश नहीं रख पायेगा।
इसी कश्माकश में वह हर दिन सागर से मिलती उसे समझाती थी, लेकिन सागर को ऐसा लगने लगा था, वह बिल्कुल अकेला और कमजोर हो गया है। वह शालिनी का सहारा ढूंढ रहा था, इधर रोज रोज सागर से मिलते मिलते शालिनी अब समझ चुकी थी, कि सागर एक हारा हुआ इन्सान है। वह जिन्दगी से हार गया है।
इसके बाद कहानी थोड़ा पीछे जाती है। जहां शालिनी भी एक बार जिन्दगी से हार गई थी, तब सागर जो कि उसे जानता भी नहीं था। उसकी मदद की थी।
आज जब वही सब सागर के साथ हो रहा था, उसे सहारे की जरूरत थी, तो शालिनी उससे किनारा करने की सोच रही थी।
क्या शालिनी के सपने सागर के प्यार पर भारी पड़ जायेंगे?
क्या शालिनी सागर को छोड़ देगी?
सागर क्या करेगा? वह कैसे अपने आप को संभालेगा?
ऐसे में क्या उसका प्यार खो जायेगा?
इन्ही सब ताने बानों से जुड़ी है हमारी कहानी ‘‘रिश्तों की डोर’’।
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, स्थान या घटना से कोई सम्बन्ध नहीं है।















