कृष्ण जी और वृन्दावन की खुरचन | Krishn Ji Ki Kahani

Krishn Ji ki Kahani

Krishn Ji Ki Kahani : हरिदास नाम का एक किसान भगवान कृष्ण का बहुत बड़ा भक्त था। वह हर महीने वृन्दावन जाता था और भगवान को पेड़ों भोग लगाता था। वहां वह पेड़े घर लाता था और बांट देता था कई सालों से यही चल रहा था।

एक दिन वह वृन्दावन में बिहारी जी के दर्शन करने जा रहा था। तभी उसने एक हलवाई की दुकान पर एक मिठाई बनती हुई देखी उसे देखकर हरिदास को कुछ समझ में नहीं आया।

हरीदास: भैया यह आप कौनसी मिठाई बना रहे हैं।

हलवाई: भैया इसे खुरचन कहते हैं यहां की मशहूर मिठाई है और नन्दलाला को बहुत पसंद है। खा कर देखो।

हरीदास: नहीं मैं पहले अपने कान्हा को भोग लगाउंगा उसके बाद ही खाउंगा एक काम करो तुम पेड़ों की जगह मुझे यह दे दो।

हलवाई से खुरचन लेकर हरिदास मन्दिर पहुंच जाता है। कृष्ण जी की पूजा कर भोग लगा कर गॉव वापिस चला जाता है।

उसके बाद वह हर महीने कान्हा जी को खुरचन का भोग लगाने लगता है।

इसी बीच गर्मिया शुरू हो जाती हैं। एक दिन वह उसी दुकान पर पहुंच जाता है लेकिन उसे खुरचन कहीं नजर नहीं आती।

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हरिदास: भैया आज खुरचन कहीं नजर नहीं आ रही

हलवाई: भैया गर्मियों में दूध की कमी हो जाती है और खुरचन में बहुत दूध लगता है इसलिए गर्मियों में खुरचन नहीं मिलती पूरे वृन्दा वन में नहीं मिलेगी आप पेड़े ले जाओ।

हरिदास: लेकिन भैया मैं तो खुरचन का ही भोग लगाना चाहता हूं आप एक काम करो मेरे लिये थोड़ी सी बना दो

हलवाई: भैया खुरचन नहीं बन सकती उसे बनाने में पूरा दिन लग जाता है। और न हमारे पास छोटे बरतन हैं जिसमें थोड़ी सी बनायें आप मेरी बात मानों पेड़ों का भोग लगा दो।

हरिदास पेड़े लेकर मन्दिर में पहुंच जाता है और भोग लगाकर वापस आ जाता है। रात के समय जब वह सो रहा था तो उसे सपने में कान्हा जी बाल रूप में दिखाई दिये। उसने देखा नन्हें से कृष्ण जी की आंखो से आंसू निकल रहे हैं और सामने पेड़े पड़े हैं।

यह देख कर हरिदास की नींद खुल गई वह रात को ही गॉव से पैदल वृन्दावन के लिए चल दिया।

सुबह दिन निकलते ही वह उस हलवाई की दुकान पर पहुंच गया।

हलवाई: अरे भाई जी आप सुबह सुबह क्या बात है।

हरिदास: भैया आप मुझे बता दो खुरचन कैसे बनेगी नहीं तो मेरे नन्दलाल भूखे रह जायेंगे।

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हलवाई: हमारे जैसी खुरचन पूरे वृन्दावन में कोई नहीं बनाता हम तुम्हें कैसे बता दें। मुझे तो लगता है किसी हलवाई ने तुम्हें खुरचन के बारे में पता करने भेजा है इसलिए तुम यहां कान्हा का नाम लेकर झूठी कहानी सुना रहे हो भागो यहां से फिर कभी नजर मत आ जाना।

हरिदास दुखी होकर कृष्ण जी के मन्दिर के बाहर जाकर बैठ जाता है वह भगवान के दर्शन करने भी नहीं जाता।

हरिदास को सुबह से शाम हो गई वह भूखा प्यास मन्दिर के बाहर बैठ कर हरे कृष्ण नाम का जाप करता रहा।

शाम के समय वह हलवाई हरिदास को ढूंढते हुए आया।

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हलवाई: भाई जी मैं काफी देर से आपको ढूंढ रहा हूं। आपको मैंने दुकान से भगा दिया उसके बाद से मेरी दुकान पर एक भी ग्राहक नहीं आया शाम तक मेरी सारी मिठाई सड़ गईं। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई नन्दलाल तुम्हारे द्वारा स्वयं मेरी मिठाई का भोग लेना चाह रहे थे। मैंने घमंड में उनके सच्चे भक्त को मना कर दिया। अब तुम मेरे साथ चलो।

हरिदास: मुझे क्षमा करो भाई मेरे कारण तुम्हें कष्ट हुआ।

हलवाई: आप पहले मेरे साथ चलो मैंने दूध मंगा लिया है अब दुकान में हर दिन खुरचन बनेगी चाहें कितनी भी मंहगी पड़े।

हलवाई हरिदास को दुकान पर लाया और उसके सामने खुरचन बनाने लगा पूरी रात खुरचन बनने में लग गई सुबह मन्दिर खुलते ही हरिदास ने भगवान का भोग लगाया उसके बाद उस हलवाई ने सारी खुरचन प्रसाद के रूप में बांट दी।

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